तुर्की जिससे और  टर्की के नाम से जाना जाता है, टर्की में गणतंत्र शासन व्यवस्था की स्थापना का  श्रेय  मुस्तफा कमाल पाशा को जाता है।


मुस्तफा कमाल पाशा का जन्म परिचय

मुस्तफा कमाल पाशा का जन्म 1881 में  सेलोनिका के एक अल्बेनियन  परिवार में हुआ था। उसकी 9 वर्ष की मृत्यु में ही उसके पिता की मृत्यु हो गई थी जिस कारण उसे छोटी सी उम्र में नौकरी करनी पड़ी।  मुस्तफा कमाल पाशा  24 वर्ष की उम्र में एक सैनिक स्कूल में शिक्षा प्राप्त करते रहे। प्रतिभा और लगन सिलता से उसके शिक्षक और दोस्तों ने उन्हें कमाल की उपाधि दी थी।

उसने क्रांतिकारी साहित्य का अध्ययन किया।

मुस्तफा कमाल पाशा रूसो और वॉल्टियर के विचारों से बहुत प्रभावित था और उसने प्रांत के नेता में मिराबो को अपना आदर्श  बनाया।  मुस्तफा कमाल पाशा ने तुर्की के विकृत शासन को बदलने की ठान ली।

मुस्तफा कमाल पाशा ने  सैनिक जीवन से अवकाश लेकर विद्रोह करने के लिए ग्रुप संगठन और सफाई करने लगे।

समय तुर्की के सुल्तान महमूद IV थे उन्होंने  मुस्तफा कमाल पाशा को बंदी बना लिया।  परंतु उस समय टर्की  प्रथम विश्व युद्ध में फंसा हुआ था इसलिए मुस्तफा कमाल पाशा को ज्यादा दिनों तक बंदी नहीं बनाया गया उसे रिहा करके युद्ध भूमि में भेज दिया गया। प्रथम विश्व युद्ध में उसने अपने सैनिक योगिता का परिचय देते हुए गेलीपेली के  युद्ध में ब्रिटेन और  ऑस्ट्रिया  की सेना को पराजित कर दिया, अब मुस्तफा कमाल पाशा का नाम दूर दूर तक  फैलने लगा।  परंतु  टर्की प्रथम विश्व युद्ध में पराजित हो गया।


Treaty of savers सेवर की सन्धि

प्रथम विश्व युद्ध में पराजित हुआ और तुर्की के साथ सेवर की संधि की गई। इस संधि के अनुसार है  है जो हेजोज को  स्वतंत्र राज्य मान लिया गया।  सीरिया फिलिस्तीन और मेसोपोटामिया से तुर्की का नियंत्रण हटा दिया गया। पूर्वी ग्रीस यूनान को दे दिया गया। बुल्गारिया से प्राप्त पश्चिम थर्स को भी  यूनान को दे दिया गया।  5 वर्षों के लिए स्मनरा का शहर और जिला के नियंत्रण में रख दिया गया। एजियान  द्वीप पर कृष की प्रभुसत्ता मान ली गई। आर्मीनिया को स्वतंत्र कर दिया गया।  तुर्की ने कुदिर्श क्षेत्र के लिए  स्थानीय स्वतंत्रता मान ली और इसके लिए कोई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था मानने का वचन दिया तुर्की ने जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और उसके आसपास के क्षेत्रों पर निशस्त्रीकरण को भी मान लिया गया

सेवर की  संधि से तुर्की की सैनिकों की संख्या निश्चित कर दी गई और अनिवार्य सेवर को बंद कर दिया गया। इस प्रतिबंध से तुर्की की सेना मित्र राष्ट्रों की इच्छा के बिना आज आ नहीं सकती थी।

आगे ब्रिटेन फ्रांस तथा इटली को मिलाकर एक आर्थिक कमीशन का निर्माण किया गया और इस कमीशन का काम तुर्की के सार्वजनिक ऋण और राज की बजट सिक्के टैक्स इत्यादि पर कड़ा नियंत्रण रखना था।

इस प्रकार तुर्की की प्रदेशिक, सैनिक और आर्थिक व्यवस्था कार से चकनाचूर हो गई संधि के कारण ,  मिस्र सूडान साइप्रस और मोरक्को पर तथा ट्यूनीशिया पर  तुर्की का अधिकार पूर्ण रूप से उठ गया । इन सभी देशों पर तुर्की का जो विशेषाधिकार था उन सब का अंत हो गया।

सुल्तान के समय कोई विकल्प नहीं था इस संधि को उन्होंने स्वीकार कर लिया परंतु इस अपमानजनक संधि का विरोध तुर्की की जनता ने कमाल पाशा के नेतृत्व में किया।  देशभक्त कमाल पाशा ने  सेवर की संधि को राष्ट्र के गौरव पर एक काला धब्बा बताया और इसका विरोध किया तथा उसने क्रांतिकारियों का गठन किया।  सुल्तान ने कमाल पाशा को बंदी बनाने का आदेश दिया परंतु उसे बंदी बनाने की हिम्मत किसी की ना होगी और कमाल पाशा ने अंकारा में एक नई सरकार का गठन किया और इस सरकार को  इटली से संधि करके मान्यता दिलाई गई। इटली ने तुर्की से अपनी सेनाओं को हटा दिया।  कमाल पाशा ने  20 नवंबर 1922 को  स्विट्जरलैंड के लोसाने नगर में एक सम्मेलन बुलाया  इस बीच तुर्की का सुल्तान महमूद  छोड़ कर भाग गया और  सेवर की संधि को  लोसाने की संधि में परिवर्तित किया गया।


लोसाने की सन्धि Treaty of Laussane

इस संधि के अनुसार तुर्की को यूनान से पूर्व थ्रस और बुल्गारिया से  एडियोनोपल  प्राप्त हुआ। स्मनरा  शहर पर तुर्की का अधिकार प्राप्त हो गया। आनातोलिया कि वे सभी प्रदेश जूली को दे दिए गए थे और इराक तथा किर्गिस्तान की सीमाओं को निश्चित करने का  भविष्य के लिए टाल दिया गया। जलसा आयोजकों पर अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण हटा दिया गया  परंतु यह निश्चय किया गया कि तुर्की वहां पर कोई किलेबंदी नहीं करेगा और संयोजक में सभी देश की जहाज  बिना रोक-टोक के तुर्की  आ सकते हैं। इस संधि ने तुर्की को पुनः अनेक विशाल प्रदेश लौटा दिए गए जिससे उनकी जनसंख्या 9000000 से बढ़कर 13000000 हो गई।

इस संधि के द्वारा कमाल पाशा की सरकार को अंतरराष्ट्रीय   मान्यता मिल गई,  ऑटोमन परंपरा दफना दी गई और तुर्की को स्वतंत्र राष्ट्रीय अस्तित्व प्राप्त हुआ। न्याय व्यवस्था, सैनिक व्यवस्था और आर्थिक बातों पर तुर्की ने विदेशी प्रभाव को समाप्त कर दिया। तुर्की पहले की अपेक्षा छोटा जरूर हो गया था लेकिन नए प्रगतिशील नेतृत्व में भविष्य के लिए उसमें नहीं आशा का संचार हुआ।  पश्चिम एशिया में शांति के लिए  सेवर की संधि की अपेक्षा लोसाने की संधि अधिक प्रभावशाली साबित हुई।  मुस्तफा कमाल पाशा ने  29 अक्टूबर 1924 को गणतंत्र  राज्य स्थापित कर दिया।


तुर्की की आधुनिक कारण और पश्चिमीकरण के लिए  मुस्तफा कमाल पाशा बारा उठाए गए कदम


लोसाने की सन्धि बाद मुस्तफा कमाल पाशा ने  तुर्की के आधुनिकरण के लिए  नए कदम उठाए। नैतिक जनता दल की स्थापना की गई यह  गणतंत्र दल कहलाया।  मुस्तफा कमाल पाशा ने  अनुभव किया था कि  भूतकाल में रीति रिवाज और संस्कृति के प्रति रुड़की बड़ा श्रद्धालु था और आधुनिक सभ्यता के संपर्क में नहीं था और इसलिए प्रकृति के द्वारा उस अपने हाथों से ही बंद कर रखे थे इसलिए  मुस्तफा कमाल पाशा ने इन द्वारों को खोल दिया तुर्की का  पश्चिमीकरण के आधार पर आधुनिकरण किया इसके लिए उसने निम्नलिखित उपाय अपनाए थे-


टर्की में राष्ट्रवाद की स्थापना
टर्की में राष्ट्रवाद की स्थापना


1 गणतंत्र वाद

मुस्तफा कमाल पाशा ने गणतंत्र बात में विश्वास रखा था,  वह तुर्की में गणराज्य स्थापित करके राजनीतिक समानता स्थापित करना चाहता था।  मुस्तफा कमाल पाशा ने खिलाफत तथा सुल्तानिया का अंत करके तुर्की को एक गणराज्य घोषित कर दिया। तुर्की गणराज्य के लिए एक नवीन संविधान की रचना हुई। इसमें मूल अधिकारों तथा जनता की संप्रभुता को  प्रमुख रखा गया।  व्यक्तिगत राजनीतिक और आर्थिक अधिकार और विचारों की स्वतंत्रता पर जोर दिया गया।  अधिकारों का स्रोत जनता को माना गया। देश में एक राष्ट्रीय सभा नामक सांसद की स्थापना की गई जिसके सदस्य जनता द्वारा निर्वाचित होने लगे तुर्की के इतिहास में असाधारण घटना थी।   की दृष्टि से समस्त देश को 62 प्रांतों में विभाजित किया गया और प्रांतों को 430 किलो मैं और जिलों को छोटे मंडलों में विभाजित कर दिया गया।


2  राष्ट्रीयता

मुस्तफा कमाल पाशा ने  तुर्की में गणराज्य की उन्नति हेतु रक्षिता का प्रचार प्रसार करना चाहता था, लेकिन रास्ता के संबंध में उसका अपना विशिष्ट विचार था। तुर्की राशि ताकि विकास के लिए वह देश का पश्चिमीकरण अत्यंत आवश्यक समझता था। इस संबंध में उसने निम्नलिखित कदम उठाए

1  शिक्षा संबंधी सुधार

तुर्की में प्रचलित शिक्षा व्यवस्था का आधार धार्मिक था। बदलती परिस्थितियों में शिक्षा व्यवस्था में आमूल परिवर्तन होना आवश्यक था। विकास के लिए बदलती हुई परिस्थितियों शिक्षा व्यवस्था में बदलाव आना ही चाहिए वरना शिक्षा सिर्फ शिक्षा के लिए ही रह जाएगी मात्र एक ढकोसला सच्ची, व्यवहारिक और उपयोगी नहीं हो पाएगी।  मुस्तफा कमाल पाशा ने तुर्की में आधुनिक शिक्षा प्रणाली की शुरुआत की।

प्रारंभिक शिक्षा अनिवार्य और निशुल्क कर दी गई। मुस्तफा कमाल पाशा ने स्कूल भवनों का निर्माण कराया और वहां निरीक्षण करने के लिए स्वयं जाने लगा। माध्यमिक शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने के लिए विदेशों से शिक्षकों को बुलवाकर तुर्की के स्कूलों में नियुक्त किया गया। पाठ्यक्रम का पश्चिमीकरण किया गया और उसमें आधुनिकतम विषयों को शामिल किया गया उच्च शिक्षा के पुनर्गठन के लिए स्विट्जरलैंड के एक प्रोफ़ेसर मल्के को तुर्की में निमंत्रित किया गया। राजनीतिक और आर्थिक विज्ञान की शिक्षा शुरू हुई। गणतंत्र वाद, राष्ट्रीयता और धर्मनिरपेक्ष वाद का पौधा धीरे-धीरे तुर्की की भूमि पर वट वृक्ष का रूप लेने लगा।


2  भाषा एवं लिपि में सुधार

प्राचीन तुर्की लिपि कठिन थी इसलिए उसका प्रयोग ने सिद्ध कर दिया गया। मुस्तफा कमाल पाशा ने अपने सलाहकारों की सहायता से इतनी लिपि निकाली तुर्की धनिया थी किंतु लिखी  लैटिन अक्षरों में जाती थी। ब्लैक बोर्ड और चौक के डिब्बों से लैस को स्वयं अपने देश का भ्रमण करने निकल पड़ा और लोगों को नई संस्कारित करने का प्रयास किया।


3  स्त्रियों की दशा में सुधार

तुर्की समाज में स्त्रियों की स्थिति बड़ी डेयरी थी उन्हें राजनीतिक और सामाजिक अधिकार प्रदान नहीं किए गए थे। मुस्तफा कमाल पाशा ने महिलाओं की स्थिति में सुधार किए तथा पर्दा प्रथा का अंत कर दिया।  1926 में बहु पत्नी विवाह तथा पत्नी त्याग समाप्त किया गया। शिक्षा व्यवस्था की गई। 17 वर्ष की आयु की लड़की का विवाह नहीं कर सकते थे। शीतल विवाह की पद्धति प्रारंभ की। तलाक के मामले में दोनों को समान अधिकार दिए गए।


4  परिधान में परिवर्तन

25 मई कानून द्वारा फेसटूपी और बुर्के का पहनना बंद कर दिया गया टोपी के स्थान पर हैट पहनना अनिवार्य  कर दिया गया हीरो की पोशाक पेंट कोट और टाई को प्रोत्साहन दिया गया।


5  मुस्लिम कैलेंडर का परित्याग 

1926 में क्रांतिकारी परिवर्तन किया गया जिसके अनुसार  तुर्की की मुस्लिम कैलेंडर का परित्याग का हीरो p-calendar को अपनाया गया तथा शुक्रवार के स्थान पर आधे शनिवार और इतवार की छुट्टी की व्यवस्था की गई।


6  नगरों के नाम में परिवर्तन राष्ट्रीयता की विकास के लिए नगरों के प्राचीन नामों को बदल दिया गया हीरो को कमान ने अपना आदर्श मानकर कंस्टेंटिनोपोल  का नाम बदलकर इस्तांबुल रख दिया।


3  न्याय व्यवस्था

तुर्की में कानून का मुख्य आधार धर्म और शरीयत था। मुस्तफा कमाल पाशा ने  इस्लाम को राजधर्म  माननीय से इंकार कर दिया और खलीफा के पद का भी अंत कर दिया फल फ्रूट संपूर्ण न्यायिक ध्वस्त हो गया।  1924 में राज्यसभा ने धार्मिक अदालतों का दीवानी मामले पर विचार करने के अधिकार का  अंत कर दिया गया।  धार्मिक मामलों की सुनवाई की वास्तव में  गैर धार्मिक संस्थाएं स्थापित की गई।  1926 में पुराने उस्मानी कानून का अंत कर दिया गया आज  स्वीटजरलैंड की पद्धति के  दीवानी कानून को अपनाया गया। इटली दंड विधान और जर्मन वाणिज्य कानूनों को लागू किया गया। औरतों के लिए विशेष कानून बनाए गए।


4  अर्थव्यवस्था

किसी भी देश में सुधार एवं निर्माण के लिए अर्थव्यवस्था आवश्यक होती है  मुस्तफा कमाल पाशा ने इसकी ओर विशेष ध्यान दिया। 1925 में उसने किसानों को विशेष छूट दी ।  भूमि अवस्था में  सामंत शाही व्यवस्था का अंत कर दिया गया। भूमि सुधार कानून के द्वारा 130 एकड़ से अधिक  भूमि वालों से भूमि छीन कर  भूमिहीन किसानों में बढ़ती गई। जप्त की गई भूमि के लिए मुआवजा दिया गया।

मुस्तफा कमाल पाशा ने आर्थिक स्रोतों पर राज्य का नियंत्रण स्थापित कर दिया। 1933 में मुस्तफा कमाल पाशा ने प्रथम पंचवर्षीय योजना लागू की। इस योजना के आधार पर बड़े-बड़े कारखानों की स्थापना की गई और राष्ट्र में औद्योगिकरण किया गया। प्रमुख उद्योगों को सरकार ने अपने हाथों में ले लिया। रेलवे के विकास में आ गया। सड़क संचार और आवागमन के लिए 10 वर्षों की योजना बनाई गई। कृषि की उन्नति के लिए  4 वर्षों की योजना बनाई गई।


5  धर्मनिरपेक्षता

वैसे तो तुर्की में बहुत सुधारक हुए थे लेकिन धर्म की चट्टान पर उनके सारे इरादे टूट गए थे मुस्तफा कमाल पाशा ने द राजनीतिक से पृथक कर दिया यूरोप में भी धर्म और राजनीति को अपने अलग अलग खेल में थे। दोनों का स्थान एक ही खेमा नहीं था, उसने खलीफा की धार्मिक अधिकारों की  इज्जत नहीं की।

भारत के 2 मुसलमानों ने  आगा खां और आमिर खान ने इसके अवरुद्ध प्रतिवेदन किया और  मुस्तफा कमाल पाशा को पत्र लिखा। परंतु मुस्तफा कमाल पाशा ने इस पर  अपने कानों को बहरा कर दिया  आगा और आमिर खान को  बैटरी साम्राज्यवाद का पुत्र बताया।

मार्च 1924 में तुर्की को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित कर दिया गया और तुर्की में राजनीतिक और धर्म दोनों अलग-अलग हो गए सभी धार्मिक स्वतंत्रता दी गई। मस्जिदों की संपत्ति को जप्त कर लिया गया।


6   क्रांति वाद

मुस्तफा कमाल पाशा ने तुर्की में क्रांतिकारी भावना के विकास के लिए निरंतर प्रयास किया। मुस्तफा कमाल पाशा का कहना था कि तुर्की की उन्नति के लिए जनता को क्रांतिकारी बनना आवश्यक है।  अखबारों और प्रगतिशील शिक्षकों के माध्यम से क्रांति की भावना को जीवित रखा गया।


मुस्तफा कमाल पाशा का मूल्यांकन

कमाल ने तुर्की को नया जीवन प्रदान किया। राष्ट्रीय संस्कृत की मंडली में सिर उठाकर फिर से चलने लगा। तुर्की की आधुनिक कारण पश्चिमी कारण मैं कमाल पाशा को सफलता प्राप्त हुई। इन सभी कार्य को करने के लिए मुस्तफा कमाल पाशा ने का सामना किया। आर्यों ने उसके आर्थिक नीति की आलोचना की

प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात तुर्की की प्रगति और उसके आधुनिकरण मुस्तफा कमाल पाशा के एक महान व्यक्तित्व की कहानी है।


FAQ मुस्तफा कमाल पाशा का पूरा नाम क्या था? (कमाल अतातुर्क उर्फ मुस्तफ़ा कमाल पाशा) था। मुस्तफा कमाल पाशा का जन्म कब हुआ था? 1881 में थेसोलोनिकी यूनान में। मुस्तफा कमाल पाशा की पत्नी का क्या नाम था? लतीफी उस्सकी । मुस्तफा कमाल पाशा के पिता का क्या नाम था? अली रजा। मुस्तफा कमाल पाशा की माता का क्या नाम था? माता का नाम जुवेदा। मुस्तफा कमाल पाशा की मृत्यु कब हुई? 10 नवंबर 1938 को इस्तांबुल तुर्की में। आधुनिक तुर्की का निर्माता किसे कहते हैं। मुस्तफा कमाल पाशा को।