19वीं सदी में यूरोप में दास प्रथा के विरुद्ध लोगों में भाव जागृत हो चुके थे। इसके परिणाम स्वरूप बीना कॉन्ग्रेस 1814 में दास प्रथा के विरुद्ध एक प्रस्ताव पारित किया था जिसकी भावना का आदर करते हुए यूरोप के अन्य देशों ने इस प्रथा की समाप्ति के पक्ष में कार्य किया। अमेरिका की संघीय सरकार जो यूरोप की हर चलो से प्रभावित होती थी ने भी 1808 में निग्रो  गुलामों दासों को अमेरिका लाने पर रोक लगाने का निर्णय लिया। यह निर्णय अमेरिका की कृषि प्रधान यह नहीं था उन्होंने इसका विरोध किया। उत्तरी राज्यों में उद्योग धंधे मशीनों पर आधारित थी अतः वहां प्रथा उन्मूलन का आर्थिक दुष्प्रभाव नहीं पड़ता इंट्रोडक्शन राज्यों का आर्थिक ढांचा कृषि पर निर्भरता जूता शो के रूप में श्रमिकों को ना उपलब्ध होने पर चरमरा जाता  इसलिए दक्षिणी राज्यों में इस प्रथा के उन्मूलन के प्रति विरोध उत्पन्न हो गया।

अमेरिका में दास प्रथा का अंत कैसे हुआ
अमेरिका में दास प्रथा का अंत कैसे हुआ



दास प्रथा के प्रश्न पर उत्तरी और दक्षिणी राज्यों  में मतभेद दिन प्रतिदिन गहराते गए। 1230 के बाद  जटिल  रूप धारण कर लिया  और 1840 तक क्यों अमेरिका की राजनीति का एक मुखर समस्या बनकर प्रकट हुई।

अटलांटिक महासागर में मिसीपी सी नदी के मध्य सभी दक्षिण राज्य दास प्रथा को  स्वाभाविक और आवश्यक समझते थे इसके विपरीत उत्तरी राज्य स्पर्धा को मानव सभ्यता के लिए  बुराई  मानती थे। इसी के फलस्वरूप उत्तर  मैं दास प्रथा उन्मूलन के लिए विलियम लाइड गैरिसन  के नेतृत्व में एक संगठन बना। दास प्रथा के विरुद्ध प्रचार करने के साथ-साथ दासों को उकसाने भी थे और दक्षिणी उत्तरी राज्यों में पहुंचने में उन्हें सहायता देते थे। दास प्रथा विरोधी दल की शाखाएं 1840 में लगभग 2000 थी और अमेरिका के विभिन्न नगरों और ग्रामों में खुल चुकी थी।

 1848 को  कैलिफ़ोर्निया को संयुक्त राज्य अमेरिका में शामिल करने के प्रश्न पर दास प्रथा आड़े आई जिस पर गृह कलह की स्थिति उत्पन्न हो गई किंतु देश के नेताओं ने  सोच समझकर के 1850 में एक समझौता कर लिया।

इस समय अमेरिका में बुद्धिजीवी वर्ग एक लोग दास प्रथा के विरुद्ध आवाज बुलंद कर रहे थे। अनेक लेखक कैसे साहित्य रचना कर रहे थे जो दास प्रथा के विरुद्ध वातावरण तैयार करने में सहायक होती थी।


अमेरिका में ग्रह युद्ध और दास प्रथा का विद्रोह

1807 में संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति पद पर अब्राहम लिंकन निर्वाचित हुए और दास प्रथा के समर्थक राजू को यह विश्वास हो गया कि लिंकन दास प्रथा को समाप्त करने का हर संभव प्रयास करेंगे। 20 दिसंबर 1807 को दक्षिण कैरोलिना ने अमेरिकन संघ से अलग होने की घोषणा की। 1 फरवरी 18 से 61 को छह अन्य राज्यों ने विद्रोह किया उन्होंने एक नया संघ बनाकर उसका संविधान तैयार किया और डेविस को राष्ट्रपति निर्वाचित कर दिया।


अमेरिका में गृह युद्ध प्रारंभ

9 जनवरी 1861 को  संयुक्त राज्य अमेरिका के एक जहाज पर दक्षिण कैरोलिना के समुद्र तट पर आक्रमण हुआ। इससे साबित हो गया कि विवाद का अंतिम निर्णय युद्ध से ही संभव है। राष्ट्रपति निर्वाचित होने के पश्चात लिंकन ने स्पष्ट घोषणा कर दी थी कि संयुक्त राज्य अमेरिका का संधि रूप अखंड  और  सशक्त होने के कारण उसके स्वरूप में परिवर्तन नहीं होने दिया जाएगा। उसने विद्रोही राज्यों को नियंत्रित करने के लिए स्वयंसेवक संगठन का गठन किया। इस तैयारी को देखकर विद्रोही राज्यों ने भी सेना  एकत्र की और दोनों पक्षों में युद्ध आरंभ हो गया।

दूधी उत्तर की राज्यों की सीमा में 2500000 और दास  प्रथा समर्थक दक्षिण के राज्यों में 1200000 से अधिक सैनिक थे। 18 सो 61 में दोनों सेनाओं में युद्ध आरंभ हुआ और अपने रूप में 4 वर्षों तक चलता रहा।  उत्तरी राज्य की सीमा क्षमता और आर्थिक   संपन्नता की दृष्टि से दक्षिण राज्यों की तुलना में सफल थी तथा उनकी जीत हुई। राजू को विवश होकर संघ में फिर से शामिल होना पड़ा। इस युद्ध में 618000 सैनिक मारे गए जिनमें उत्तरी राज्यों के  तीन लाख साठी हजार तथा दक्षिण राज्यों के 258000 सैनिक थे। दोनों पक्षों का  खर्चा 5  अरब रुपयों से अधिक था। अपार धन और जन का नुकसान  उठाकर यह बात  निश्चित की गई कि अमेरिकी संघ की एकता को स्थापित रखना आवश्यक है व्यक्तिगत    राज्य की आवश्यकता से अधिक महत्वपूर्ण है।

इस गृह युद्ध को उत्तरी राज्यों में महान विद्रोह और दक्षिणी राज्यों में राज्यों का विद्रोह कहां गया।


अमेरिका में दास प्रथा की समाप्ति

1863 में राष्ट्रपति लिंकन की घोषणा के बाद सभी देशों को स्वतंत्र कर दिया गया। प्रारंभ में दास के मालिकों को मुआवजा दिए गए किंतु बाद में बिना मुआवजा की मारी को की संपत्ति जप्त कर दास को मुक्त कर दिया गया।

अमेरिका में दास प्रथा का अंत कैसे हुआ
अमेरिका में दास प्रथा का अंत कैसे हुआ



अमेरिका के युद्ध में यूरोप देशों की भूमिका

इस युद्ध में यूरोप के अधिकांश देश  तटस्थ रहे। इंग्लैंड तथा फ्रांस राजनीतिक लाभ के लिए इस युद्ध में शामिल हो गए थे किंतु उनके जनता का बहुमत इसके विरुद्ध था जिससे वे साहस न जुटा सके।


अमेरिका गृह युद्ध के अन्य प्रभाव

नीग्रो लोगों की   स्वाधीनता और समानता   के अवसर प्रदान करने के लिए अमेरिकी संघीय सरकार ने अनेक कानून पारित किए।  1868 में संविधान संशोधन द्वारा  उन्हें नागरिकता के अधिकार दिए गए। 1270 में उन्हें मताधिकार प्रदान किया गया। अट्ठारह सौ पैसठ  नीग्रो लोगों की सहायता हेतु स्वतंत्रता किए गए लोगों के लिए विभाग की स्थापना की गई।

इन सब के बावजूद  अमेरिका में नीग्रो लोगों की प्रति द्वेष भाव नहीं समाप्त हुआ है।