हेलो दोस्तों इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि भारत में नाग पंचमी  naggpanchami क्यो बनाई जाती है क्या कारण है ओर इसका क्या महत्व है भारत में आज ये सारी जानकारी आपकी इस आर्टिकल पर मिलेगी।


नागपंचमी (nag panchmi)

हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में आपको नाग पंचमी के बारे में  बताएंगे कि भारत में नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है।

नागपंचमी  हिंदुओं का  प्रमुख त्योहारों में से हैं।  भारत में हिंदू पंचांग के अनुसार  शुक्ल पक्ष को  नागपंचमी के रूप में बनाया जाता है।  इस दिन है  सर्प को दूध  से स्नान कराया जाता है।  सभी   हिंदू महिलाएं   इस दिन व्रत लेती हैं।  नागपंचमी के दिन  वाराणसी के काशी में   मेला लगता है।  भारत में  प्राचीन  समय में  नाग जनजाति पाई जाती थी।  नाग पंचमी के दिन सर्प को     नहाया जाता है  लेकिन कई स्थानों में दूध पिलाने की परंपरा शुरू हो गई है।

नागपंचमी के दिन  खेतों में हल नहीं चलाया जाता है  माना जाता है कि इस दिन अगर  खेतों में हल चलाया जाएगा सर्प  मर भी सकते हैं और  उनका पाप लग सकता है।


नाग पंचमी nag panchami क्यों मनाई जाती है?

बहुत से लोग यह सोच रहे होंगे कि  भारत में  नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है इसके पीछे बहुत बड़ा कारण है।

स्कंद पुराण और  गरुड़ पुराण में  वर्णन मिलता है कि  जमुना नदी के अंदर कालिया नाग  निवास करता था।   इसका विश  इतना भयंकर था कि  पूरी जमुना नदी  विषक  हो गई  आसपास का पूरा क्षेत्र  की फसलें नष्ट हो रही थी और पशु पक्षी  आदि  जल पीने से मर रहे थे।

गरुण पुराण के अनुसार है  1 दिन श्रीकृष्ण ने   कालिया नाग को  जमुना नदी से निकालकर  पाताल लोक पहुंचा दिया  तथा लोगों को उसके भाई से मुक्त  कर दिया  तब से  ब्रज क्षेत्र में  नागपंचमी बनाई जाती है

वराह पुराण के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा जी ने शेषनाग को पृथ्वी धारण करने की  अनुपम सेवा  सौंपी थी।

चरक संहिता में नागों का वर्णन मिलता है।  नागों का मूल स्थान   पाताल लोक है।


नाग पंचमी त्यौहार बनाने के पीछे  भारतीय पुराण में कथा प्रचलित है।

History of nag pnchami

एक सेठ जी के  7 पुत्र थे और  सातों पुत्र का  विवाह  हो चुका था। छोटे पुत्र की  पत्नी बहुत समझदार और सुशील थी परंतु उसका कोई भाई नहीं था।

1 दिन  घर लीपने के लिए  सातों बहू  पीली मिट्टी लेने के लिए गई।  जैसे ही वह  मिट्टी खोदने लगी  तभी एक सर्फ निकल आया ।बड़ी बहू उस सर्प को  कुंटली से   मारने लगी तभी छोटी बहू ने कहा ऐसे मत मारो  यह  निर अपराधी है।  तब बड़ी बहू ने उसे ही नहीं मारा। सर्प एक  स्थान में जाकर बैठ गया। छोटी बहू ने सर्प से कहा   तुम यहीं पर बैठे रहना हम अभी आते हैं लेकिन वह घर जाकर भूल गई। दूसरे दिन जब उसे याद आया  तो वह   सब को लेकर उस  स्थान पर पहुंच गई और कहा  सर्प  भैया नमस्कार। तो सर्प ने जवाब दिया  तूने भैया कह दिया है तुझे छोड़ दे रहा हूं ,नहीं तो  झूठी बात बोलने के कारण  तुझे भी ड्स देता।  छोटी बहू ने कहा मुझसे भूल हो गई थी मैं उसकी माफी मांगती हूं। तो सर्प ने कहा  आज से मैं तेरा भैया  और तू मेरी बहन हुई।  तुझे जो मांगना है मांग सकती है तो  छोटी बहू ने कहा कहा मेरा कोई  भाई नहीं है कि  अच्छा होगा कि तुम मेरे भाई बन गए।

समय बीतता गया एक दिन सर्प छोटी बहू के घर  मनुष्य के रूप में गया।  और घर जाकर  कहा कि मेरी बहन को भेज दो। सब लोग आश्चर्यचकित हो गए थे कि  इसका तो कोई भाई  नहीं है। तो सर्प ने कहा  मै इसका का दूर का  रिश्तेदारी का भाई हूं बचपन में घर से बाहर चला गया था।   उसके   विश्वास दिलाने के बाद  छोटी बहू को उसके साथ भेज दिया गया।  उसने रास्ते में बताया कि मैं वही सर्प हूं  इसलिए तुम डरना नहीं  अगर चलने में  कहीं कठिनाई लगे तो  मेरी  पूछ पकड़ लेना।  इस प्रकार छोटी बहू सर्प के  घर पहुंची वे वहा का धन धान्य  देखकर चकित रह गई।

1 दिन सर्प की  माता घर से बाहर जा रही थी तो उसने  छोटी बहू से कहा अपने भाई को ठंडा दूध पिला देना लेकिन गलती से छोटी बहू ने  गर्म दूध पिला दिया उसका मुंह जल गया। सर्प की  मां बहुत  क्रोधित हो गई।  छोटी बहू के भाई के समझाने पर वह चुप हो गई थी। एक दिन सर्प के  पिता ने कहा कि  बहन को अब घर भेज देना चाहिए ।  छोटी बहू को बहुत सा  सोना दे कर  उसके घर भेज दिया गया

जब  छोटी बहू घर पहुंची तो   बड़ी बहू ने  ईर्ष्या  से कहा कि इसका भाई तो  बड़ा धनवान है  इसे तो  और धन  लाना चाहिए।  यह बात  छोटी बहू के भाई ने सुन ली और वह उसे और धन दे गया।

एक ही छोटी बहू के भाई ने  छोटी बहू को मणि का हार दिया।  इस हार की प्रशंसा  हर जगह होने लगी।  एक दिन यह बात रानी को भी पता चली अपने राजा को आदेश दिया कि  सेठ जी से यह हार मंगवाया जाए और राजा ने अपने सैनिकों के द्वारा उस हार को मंगा लिया । इस घटना को छोटी बहू ने अपने भाई को  बताई।  छोटी बहू ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता है कि क्या जब रानी हार पहने तो  वह सर्प  बन जाए।  छोटी बहू के भाई ने  यह बात मान ली। जब भी रानी हार को पहनती थी तो वह हार सर्प  बन जाता था।  फिर राजा ने  छोटी बहू को

राज दरबार में बुलाया  वह हार पहनने को कहा  तो छोटी बहू ने कहा  जब मैं इस हार को पहनती हूं  तो यह   हीरा और मणि का हो जाता है।  राजा ने छोटी बहू को आदेश दिया इस हार को अभी पहन कर दिखाओ। जब छोटी बहू ने हार पहना तो वह  मणि और हीरे का हो गया।

छोटी बहू से  बहुत खुश हुआ।  उसने छोटी बहू को पुरस्कार और हार  लौटा कर घर भेज दिया।

इसे देखकर बड़ी बहू बहुत  ईर्ष्या हुई।  उसने छोटी बहू की पति से कहा कि आपकी पत्नी के पास कहीं से धन आता है।   छोटी बहू की पति ने बहू को बुलाया  कहां की  तेरे पास धन कहां से आता है छोटी बहू सर्प को याद करने लगी।  उसी समय  वहां सर्प  प्रकट हो गया उसने कहा कि कोई भी  मेरी बहन के  आचरण पर संदेश करेगा  मैं उसे खा लूंगा।   छोटी बहू का पति सर्प की यह बात सुनकर  बहुत खुश हुआ।  उस दिन से उसने सर्प की  देवता स्वीकार कर लिया  और इसी दिन से भारत में नाग पंचमी बनाई जाती है और स्त्रियां नागों को अपना भाई समझ कर  उनकी पूजा करती है।


नाग पंचमी कैसे बनाएं( nag panchami kese बनाए)

नाग पंचमी पूरे भारतवर्ष में बनाई जाती है।  इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर  अपने घरों की  लिपाई और पुताई करते हैं।

स्त्रियां अपने घर में गोबर से सर्प की आकृति  बनाती है।

नाग पंचमी के दिन लोग अपने आसपास की शिव जी के मंदिर में  नाग देवता को स्नान कराते हैं लेकिन कहीं कहीं पर नाग देवता को दूध  पिलाया जाता है।

इस दिन सभी स्त्रियां व्रत लेती हैं।

इस दिन  खेतों में  हल नहीं जोता जाता है  क्योंकि लोगों का मानना है  अगर इस दिन  खेती की जाएगी सर्प  हानि पहुंचाने का भय रहता है।


नागपंचमी का महत्व ( nag panchami ka mahtv)

प्राचीन काल से ही भारत में  नागों का महत्व रहा है।

नागों को देवता के समान माना जाता है  पूरी सृष्टि में  श्री हरि विष्णु जी, कृष्ण जी नाग पर  विश्राम करते हैं।

भगवान श्री कृष्ण के जन्म के बाद गोकुल से मथुरा ले जाते समय   श्रीकृष्ण को  बारिश से   शेषनाग में बचाया था।  नागपंचमी के दिन है  सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने  शेषनाग को पूरी पृथ्वी को अपने  फन पर  धारण करने का अवसर दिया था। देवों के देव  महादेव के गले में भी  शेषनाग है। पृथ्वी में अमृत मंथन पाने के लिए   वासुकी नाग  देवताओं और  राक्षसों ने  रस्सी के   रूप में प्रयोग किया था। ज्योतिष शास्त्र में नाग के स्वरूप में  राहु और केतु के बीच  जब  सब ग्रह आ जाते हैं तो  काल सतयुग पड़ता है।

पुराणों में  नाग  देवता के समान पूजा जाता है।


नागपंचमी nag panchami पर निबंध



भारत प्राचीन काल से ही अपनी संस्कृति के लिए विख्यात है।

प्राचीन भारत में नागो की जाती ने निवास किया है।

नागो को देवता ओर भगवान के सामान माना है। स्त्रियां इनकी भाई के रूप में पूजा करती है।

इन्हें शक्ति और सूर्य का  अवतार माना जाता है। नाग पूजा   प्राचीन काल से ही  चली आ रही है। श्रावण महीने के शुक्ल पंचमी को  नागपंचमी के रूप में  मनाया जाता है।  इसलिए इसे नागपंचमी के रूप में  प्रसिद्धि मिली। इस दिन नागों का दर्शन शुभ माना जाता है। प्राचीन भारत में लीलाधर नामक एक किसान था  उसके 3 पुत्र और एक पुत्री थी।  एक दिन जब किसान हल चला रहा था तो उसके हल से  एक सांप के बच्चे की  मौत हो गई। नागिन अपने बच्चे का मौत का बदला लेने  किसान के घर गई।  नागिन ने किसान और उसकी पत्नी और उसके बेटे को डस दिया  उनकी मौत हो गई लेकिन किसान की बेटी बच गई।  सुबह नागिन फिर से किसान के घर गई किसान की बेटी ने नागिन को  प्रसन्न करने के लिए दूध का कटोरा रख दिया था।  किसान की बेटी ने नागिन से हाथ जोड़कर माफी मांगी और अपने माता पिता को फिर से जीवनदान देने के लिए कहा।   नागिन ने खुश होकर किसान की पूरे परिवार को  जिंदा कर दिया और यह वरदान दिया कि  श्रावण शुक्ल के पक्ष में जो महिला  नागिन की पूजा करेगी  उसकी कई पीढ़ी सुरक्षित रहेंगे।   इस दिन से ही नागपंचमी बनाई जाती है।  सुबह उठ कर नहा धोकर साफ कपड़े पहन कर पूजा की जाती है।  दीवार को गोबर से पोता  जाता है।  घर की धेली पर  नाग का चित्र बनाया जाता है ।नाग देवता को  सुगंधित  फूल से  सफेद ब्रह्म कमल और चंदन की  लकड़ी से पूजा की जाती है नाग देवता को सुगंध प्रिय है।  इस दिन  ब्राह्मणों को खाना खिलाया जाता है और खीर  परोसी जाती है।  नाग देवता को दूध से स्नान कराया जाता है। इस दिन नाग देवता को दूध नहीं पिलाया जाता है माना गया है कि   दूध पिलाने से  उनकी मृत्यु हो जाती है। इस दिन मिट्टी खोदना  पूर्णता प्रतिबंधित होता है नागपंचमी के दिन  तवे पर रोटी नहीं बनाई जाती है।  माना जाता है कि  नाग का फन तववे के समान होता है। आग में  तव्वे को रखना मतलब  नाक के  फन को रखना।

इस प्रकार भारतीय संस्कृति में नागों को मारना एक अपराध है।


nag panchami date 13 August Friday 2021